प्यार के लिए तरसते हुए ही
जान जाएगी शायद.
कोई नहीं,
आखिर ये जान
किसी काम तो आएगी शायद.
सोचा प्यार सबको मिलता है
मुझे भी थोड़ा मिल जाए
थोडासा ही,
ज्यादा की औकात नाही मेरी शायद.
मानो खुदको काबिल भी करलूं
तेरे इश्क में शायरी भी करलूं
उस खुदाके नग्मे भी गालूं
जिसके तू सदके करता हैं
फिर भी हमें तुम अपना ना कहोगे
फिर भी हमें तुम प्यार ना दोगे
फिर भी हम यहीं राह देखेंगे
हा सच्ची,
फिर भी हम यहीं राह देखेंगे
ये दिल क्यू तुमपेही आया
इस सवाल का जवाब ढूँढ़ते हुए, शायद.
जानते है
जवाब कोई ना मिलेगा
ना ही तुम मिलोगे
और जिंदगी यूँही थामेंगी, शायद.








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